रुकिये! अपना मोबाइल नीचे रखिये और खुद से एक सवाल किजिये कि आज मैने कितनी बार ऐसे ही मोबाइल हाथ मे उठाया ?

सुबह उठते ही सबसे पहले मोबाइल, रात को सोने से पहले हाथ मे मोबाइल , और दिन भर हाथ में मोबाइल !
बस उंगलियाँ चलती रहती हैं -स्क्रॉल, स्क्रॉल और स्क्रॉल
कई बार ऐसा होता है कि हम खुद नही जान पाते कि हम क्या देख रहे हैं , क्यों देख रहे है और हमें कब रुक जाना चाहिए|
बस यही आदत Zombie scrolling कहलाती है|

मोबाइल का अधिक उपयोग क्या है?
मोबाइल का उपयोग बुरा नही है , मेरे अनुसार तो इस time का सबसे अच्छा invention है लेकिन जब इसका जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल होने लगे तो इसको लत कहते हैं|
किसी काम के लिए मोबाइल हाथ में लेते हैं लेकिन काम ख़त्म हो जाता है लेकिन मोबाइल हाथ में ही रहता है|
यही से शुरुआत होती है उस आदत की जो हमारे जिंदंगी का समय खाने लगती है|
Zombie Scrolling क्या है?
इसका मतलब है कि बिना किसी मकसद या काम के लगातार स्क्रॉल करते रहना| एक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म दूसरे पर चले जाते है और हमें पता भी नही चलता|
शोध बताते है कि एक स्क्रॉल जॉम्बी daily 300 फीट के आसापास कंटेंट स्क्रॉल करता है|
ऐसा करने से हमें ना कोई खुशी मिलती है , ना ही कोई जानकारी याद रह पाती है और फिर भी हम रुकते नहीं|
अब हम मोबाइल नहीं चलाते हैं बल्कि मोबाइल हमें चला रहा होता है और हमें पता भी नही चलता|
जॉम्बी स्क्रालिंग से क्या नुकसान है ?
लगातार स्क्रॉल करने से हमारे शरीर में रासायनिक बदलाव होते रहते हैं और तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क अधिक सक्रीय हो जाते हैं और धीरे धीरे चिंता और बोझ बढ़ने लगता है|
आँखों पर सबसे पहले प्रभाव पड़ता है
हम बिना पलक झपकाए लगातार स्क्रीन देखते हैं, इससे आँखों में जलन, धुंधलापन, रूखापन होने लगता है|
आँखें कमजोर होना और जल्दी चश्मा चढ़ जाना तो आम बात है|
नींद में परेशानी होना
मोबाइल से निकलने वाली blue light से मस्तिष्क में नींद लाने वाले हार्मोन का स्त्रवण नहीं होता है, मस्तिष्क को लगता है कि अभी दिन है| लगाता ऐसा होने से अनिद्रा होने लगती है|
गर्दन और पीठ में दर्द की समस्या
लगातार गर्दन झुकाकर मोबाइल देखने से कम उम्र में है गर्दन और पीठ दर्द की शिकायत होने लगती है| शरीर का पॉश्चर बिगड़ने लगता है|
बिना काम के थकान का अनुभव
लगातार स्क्रीन देखने से शरीर थका हुआ महसूस होता है जब कि कुछ ख़ास काम नहीं किया होता है, ये मोबाइल के overuse का संकेत है|
आपने भी अक्सर ऐसा ही महसूस किया होगा|
मानसिक स्वास्थ पर मोबाइल चलाने के नुकसान
हमने शरीर पर होने वाले नुकसान के बारे में जान लिया लेकिन मोबाइल चलाने का दुष्प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ पर भी बहुत गहरा होता है और हमें इसके बारे में काफी देर से पता चलता है|
Zombie Scrolling से ध्यान में कमी
हम लगातार मोबाइल पर स्क्रोलिंग करते रहते हैं और हमारे सामने नए नए कंटेंट्स आते रहते हैं| हम घंटो instream पर reels देखते रहते हैं या YouTube पर shorts देखते रहते हैं|
हम एक जगह नहीं रुकते ये आपने भी notice किया होगा| अब हम 10 सेकंड्स के लिए भी किसी एक कंटेंट पर नहीं रुकते हैं| यानि मतलब साफ़ है कि हमारे ध्यान में कमी हो रही है|
तनाव , चिंता और चिडचिडापन
सोशल मीडिया पर कई तरह का कन्टेन्ट परोसा जा रहा है और इसको देखकर हम एक तनाव की स्थिति में आ जाते हैं| हम समझ ही नहीं पाते कि हमारे अंदर चिडचिडापन घर कर गया है| जो हमारे व्यवहार में दिखाई देता है|
कई बार तो ऐसा होता है कि social media पर दूसरों की life देखकर हम चिंता करने लग जाते है कि लोग इतने आगे निकल गए और हम पीछे रह गए|
यादाश्त कमजोर होना
आज हम मोबाइल पर कुछ भी सर्च कर लेते हैं , कोई भी जानकारी एक click में मिल जाती है और अब तो AI features मोबाइल में आने से एक सेकन्ड से भी कम समय कोई भी जानकारी या सवाल का हल मिल जाता है, ऐसे में हमारा मस्तिष्क सोचता भी नहीं या किसी समस्या का समाधान नहीं निकालता| इससे यादाश्त कमजोर होती जा रही है| ये चिंता का विषय है|
देर रात तक मोबाइल चलाने के नुकसान
रात को देर तक जागते रहना और मोबाइल पर scrolling करते रहना या फिर दोस्तों से chat करते रहना हमारे लिए शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से नुकसानदायक है|
नींद खराब होना
सबसे पहला असर तो हमारी नींद पर होता है, लम्बे समय तक रात को मोबाइल चलाने की आदत से हमें नींद नहीं आने की समस्या होने लगती है| मोबाइल की blue light हमारे मस्तिष्क को ये संकेत देती है कि अभी दिन है इसलिए हमें नींद नही आती और सुबह थकान बनी रहती है|
हार्मोनल disturbance
जैसे ही रात होने लगती है,वैसे ही हमारी पीनियल ग्रंथि मेलाटोनिन हार्मोन स्त्रावित करती है जो कि नींद लाने में सहायक है|
लेकिन मोबाइल की रोशनी के कारण मस्तिष्क को दिन होने का आभास होता है तो ये ग्रंथि हार्मोन स्त्रावित नहीं करती है| हमारा नींद का चक्र बिगड़ जाता है|
बच्चों और विद्यार्थियों पर मोबाइल का असर
आज छोटे छोटे बच्चों के हाथों में खिलौनों की जगह मोबाइल नजर आता है| बच्चे लगातार मोबाइल देखते रहते हैं| मैंने तो देखा है कि विद्यार्थी हर जगह मोबाइल हाथ में लिए घूमते रहतें है|
इससे उनका पढाई में ध्यान नहीं लगता और किताबें तो उनको उबाऊ लगने लगती हैं|धीरे धीरे उनका स्वभाव चिडचिडा हो जाता है| समय के साथ ये समस्या बढ़ जाती है|
दिनभर मोबाइल चलाने का जीवन शैली पर असर
आज हम कहते हैं कि हमारे पास समय ही नहीं , हम दोस्तों से मिलना छोड़ चुके हैं और यहाँ तक एक ही घर में सभी सदस्य अपना अपना मोबाइल लिए अलग अलग बैठे रहते हैं|
ये आदत हमें सामाजिक जीवन से दूर करती जा रही है, सब एकाकीपन का शिकार हो रहे हैं|
दिन भर मोबाइल पर व्यस्त रहने से समय की बर्बादी हो रही है, हमें शाम को पता चलता है कि आज हमने कुछ भी productive नहीं किया |
मोबाइल की लत और Zombie Scrolling से कैसे बचें?
मोबाइल की लत या Zombie Scrolling से बचना या इसे ख़त्म करना कोई एक दिन की बात नही है इसके लिए लगातार प्रयास करना होगा
स्क्रीन टाइम कम करने के तरीके
सबसे पहले प्रयास करें कि मोबाइल को अपने से दूर रखें|
मोबाइल का चार्जिंग point दूर रखें जिससे कि आपका हाथ तुरंत वहां नहीं पहुंचे|
आजकल कुछ apps उपलब्ध हैं जिनको अगर आप सेट कर दे तो वे आपको कोई social site, YouTube या और कोई प्लेटफार्म खोलने नही देता, धीरे धीरे आप इसका अभ्यास करेंगे तो कुछ ही दिनों में आपकी आदत बनने लगेगी| आपका स्क्रीन टाइम कम होने लगेगा|
Notification को ऑफ कर दें तो आप फोन को बार बार हाथ में लेने से बचे रहेंगे|
रात में मोबाइल चलाने से बचने के तरीके
रात में आप अपने परिवार के साथ कुछ बातें करिए और अपने मोबाइल को दूसरे कमरे में रख दीजिये|
आप डायरी लिखें , उसमे सुबह से लेकर जो किया वो सब लिखें और अगले दिन जो करना है वो भी लिखें|
सोने का समय निश्चित करें, इससे एक समय बाद मोबाइल देखने से बचेंगे|
अपने बिस्तर के पास अलार्म घड़ी रखें, ऐसा करने से आप सुबह उठते ही मोबाइल हाथ में नहीं लेंगे|
डिजिटल डीटोक्स कैसे करें
मोबाइल को छोड़ना नहीं है, ये बहुत उपयोगी चीज है| हमें इतना करना है सप्ताह में कम से कम एक दिन या कुछ घंटो मोबाइल को हाथ नही लगाना है| हाँ शुरू शुरू में थोड़ी परेशानी और बैचेन होगी लेकिन लगातार करने से आदत हो जायेगी|
हमें हर समाचार जानना जरूरी नहीं है , उसके बिना भी दुनिया चलती है| सुबह अखबार पढ़ें या कोई कोई किताब पढने की आदत बनाएं|
मैंने तो रात में सोने से पहले किताब पढ़ना शुरू किया है|
Sunday को मोबाइल को एक तरफ रख कर, थोड़ा टहलें, पौधों में पानी दें, कुछ लिखें, ड्राइंग करें या बच्चों के साथ खेलें|
याद करें हो सकता है कि कोई hobby थी जो अब छोड़ चुके हैं ,उसे वापस शुरू करें|
निष्कर्ष
मोबाइल हमारी जिन्दगी का हिस्सा है, पूरी जिन्दगी नहीं|
अगर आपको यह लगने लगा है कि मोबाइल आपकी नींद, समय, ध्यान और रिश्तों को चुरा रहा है तो समझ जाइए … कि अब रुकना जरूरी है|
आज कम स्क्रॉल करें और जिन्दगी को जीना शुरू करें| स्क्रीन के बाहर भी एक खूबसूरत दुनियाँ है
तो वादा कीजिये कि अब Zombie scrolling से बचेंगे|