प्रकृति ने हमें एक निरोगी काया (body) उपहार में दी है | इस शरीर में सभी अंग /तंत्र सुचारू रूप से काम करते हैं |जन्म से हमारे अंग प्राकृतिक रूप से सही तरीके से काम करते हैं ,किसी जन्मजात बीमारी को छोड़ दें, यानि हमारा शरीर निरोगी होता है |
जिस तरह हमारे लिए साँस लेना जरूरी है , उतना ही शरीर का निरोगी या स्वस्थ्य रहना भी जरूरी है | हमारी साँसे निरंतर बिना प्रयास के चलती रहती हैं लेकिन शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमें कोशिश करते रहना पड़ता है | अगर हम प्रयास नहीं करेंगे तो स्वस्थ रहना संभव नहीं है |

समय के साथ जैसे जैसे हमें बड़े होते हैं , हम हमारे मूल प्राकृतिक स्वाभाव को भूल जाते हैं |
यही कारण है निरोगी शरीर से रोगी शरीर बन जाने का , हमें पता ही नही चलता कि क्या किया जाए ?
निरोगी जीवन के लिये क्या आवश्यक है ?
निरोगी जीवन जीने के लिए क्या जरूरी है उसके लिए आप पहले ये प्रश्न अपने आप से करें –
- निरोगी रहने के लिए क्या किया जाए ?
- क्या निरोगी रहने के लिए धन की जरूरत है ?
- प्रकृति से जुड़ने के आसान तरीके
- शरीर की आवाज कैसे समझें?
- शरीर में जैविक घड़ी और उसका महत्त्व
- जीवन शैली में सुधार और बदलाव
- जल्दी सोना – जल्दी उठना – अच्छी आदतें
- योगा और मेडिटेशन का साथ
- उचित/ पौष्टिक भोजन जरूरी है
1.निरोगी रहने के लिए क्या किया जाए ?
एक व्यक्ति को स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए अपने प्राकृतिक स्वरूप में रहना होगा | हमें हमेशा प्रसन्न रहना जरूरी है जो कि हमारा मूल स्वभाव है | इसके साथ साथ नियमित व्यायाम , पौष्टिक भोजन और संयमित और संतुलित जीवन जीना |
जीवन में आने वाली समस्याओं से शांत होकर धैर्य के साथ साहस से लड़ना है | जीवन में संतोष का होना जरूरी है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम प्रयत्न करना छोड़ दे |
कड़ी मेहनत जरुरी है लेकिन अंधी दौड़ में शामिल नहीं होना है हमें , काम करो लेकिन आपसी सहयोग और धैर्य के साथ |
आधुनिक आपाधापी से बचना सबसे ज्यादा जरूरी है | आप मेरी इस बात से जरूर सहमत होंगे | इस दौड़ में एक प्रश्न हमारे आपके दिमाग में जरूर आता है कि स्वास्थ्य और रुपया – पैसे में कैसे सम्बन्ध बनाया जाए |
2.क्या निरोगी रहने के लिए धन की जरूरत है ?
धन या पैसा जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने का साधन है लेकिन केवल अपनी भैतिक सुख सुविधाओं को पूरा करने के लिए धन कमाया जाए और उसके पीछे अंधा हुआ जाये ये बुद्धिमानी नहीं क्यों कि ऐसा ना हो कि हमारा स्वास्थ पीछे छूट जाए !
धन अच्छे स्वास्थ्य या निरोगी शरीर की गारंटी नही है| पैसे से आप सुख सुविधाओं को खरीद सकते हैं किन्तु स्वस्थ जीवन नहीं |
आज जैसे जैसे हमारे आस पास भौतिक साधनों , नई टेक्नोलोजी का अम्बार लगता जा रहा है , हमें सब हमारे पास चाहिए , बस यही वो कारण है जो हमें हमारे स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने को मजबूर करता है |
अपने परिवार की अभी आवश्यकताओं को पूरा करने की आपा धापी में हम कब अपन स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने लग जाते हैं पता ही नही चलता |
सब कुछ संतुलित चलता रहे उसके लिए क्या करें , आइये आपको बताते हैं |
3.प्रकृति से जुड़ने के आसान तरीके

हमारे आस पास अगर देखें तो हमें आलग अलग तरह के लोग मिलेंगे, आप उन पर जरूर गौर करें |
मुझे एक परिचित ध्यान में आता है , उनके पास खूब पैसा , सुख सुविधाएँ है लेकिन वो उनका उपभोग नही कर पा रहें हैं , पता हैं क्यों ? क्यों कि डाक्टरों ने उन पर कई तरह की पाबन्दियाँ लगा रखी हैं ,इसलिए वह दुखी है |
दूसरा एक और मेरा जानकार जिसके पास पर्याप्त पैसा नही हैं , इसलिए दुखी है | यानि दुखी तो सभी हैं |
अब प्रश्न है कि ऐसा क्या करें ? कि हम खुश रह सके और सुखी हों |
इसका एक ही उपाय है कि हम प्रकृति से जुड़ें | जैसे जैसे हम प्रकृति के पास जायेंगे , हमारा स्वास्थ्य भी अच्छा रहने लगेगा ये मेरा व्यक्तिगत अनुभव है |
हम हमेशा उत्साहित रहने लगेंगें | जब आप में उत्साह / प्रसन्नता होगी तो आप जैसी ही स्थिति में है , आपको जीवन जीने का मजा आने लगेगा |
अब प्रश्न है कि प्रकृति से कैसे जुड़ें ? आइये आपको बताते है कि प्रकृति से कैसे जुड़ा जाए | आपको केवल अपने जीवन में प्राकृतिक नियमों का पालन करना है | अब ऐसे शुरुआत कर सकते है –
- अपने शरीर की आवश्यकता के अनुसार नियमित रूप से व्यायाम करें | शुरुआत में आप केवल 20-25 मिनट घूमने जाइए | इसके लिए आप अपने अनुसार समय तय कीजिये |
- मात्र 10-15 मिनट ध्यान (मेडिटेशन) करें |
- कुछ मिनट के लिए प्राकृतिक वातावरण / हरियाली को देखिये , उसे महसूस कीजिये |
- अपने पसंद का संगीत सुने |
- परिवार व मित्रों के साथ समय गुजारें |
- अपने आस पास का वातावरण स्वच्छ रखें |घर में गार्डनिंग करें |
- भोजन पौष्टिक लें |
ये तो कुछ सामन्य से काम हैं जो हम कर ही सकते हैं इसके अलावा आपको जो अच्छा लगे वो करें |
ये तो मरे अनुभव हैं जो मैंने लिखे है , आपके पास जो अनुभव है उन्हें शामिल करें |
इस संसार में अरबों लोग रहते हैं जिनका रहन सहन , खान पान , परिवेश , जलवायु अलग – अलग है | हम सब अलग धर्म को मानने वाले हो सकते है लेकिन हमारे शरीर की बनावट सामान है , इसका मतलब है कि हमारे शरीर की सभी क्रियाएँ एक जैसी है |
हमारा शरीर हमें कुछ संकेत देता रहता है , बस जरुरत है उसकी आवाज सुनने की |शरीर की आवाज सुनने के लिए कान की नहीं अनुभव की जरुरत है |
4.शरीर की आवाज कैसे समझें?
हमारा शरीर बहुत कुछ कहता है | जैसे जैसे उम्र बढती है वैसे वैसे हम शरीर की आवाज सुनने की हमारी क्षमता बढ़ जाती है | लेकिन हम इस आपाधापी में उस तरफ गौर नहीं करते हैं |
शरीर हमें बताता है कि हमें कब किस चीज की जरुरत है , किस चीज की कमी है या कौनसी चीज ज्याद है |
जो इंसान समय रहते अपने शरीर की आवाज सुन लेता है वह अपने आप को सम्भाल लेता है और जो ऐसा नहीं कर पाते उन्हें डॉक्टर ही सँभालते है |
5.शरीर में जैविक घड़ी और उसका महत्त्व

ईश्वर, अल्लाह या गॉड ने जो खूबसूरत शरीर हमें दिया है , उसमे एक जैविक घड़ी है जो समय समय पर हमें संकेत देती रहती है | हमारे शरीर में जो भी क्रियाएँ होती रहती है वो सब जैविक घडी से ही नियंत्रित होती है |
हमारा सोना -जागना . सोचना , भूख सब जैविक घडी से ही तो चल रहा है | जब जैविक घड़ी की सेटिंग बिगड़ जाती है तो हमारे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है |जो भी बीमारी होती है वो सब जैविक घड़ी में गड़बड़ी के कारण होती है |
इस जैविक घड़ी को ठीक करने के लिए क्या किया जाए , चलिए आपको बताते है|
6.जीवन शैली में सुधार और बदलाव
इस कोरोना काल ने हमें बहुत कुछ सिखया | आप और हम स्वस्थ्य रहने के लिए बहुत सी जानकारियाँ और टिप्स इंटरनेट पर ढूढने लग गए |
पिछले एक साल में बहुत कुछ बदला है | हमने ये जाना कि बहुत सी बीमारिया तो हमारी लाइफ स्टाइल के कारण है , अगर हम अपनी लाइफ स्टाइल जीवन शैली में धीरे धीरे बदलाव करें तो अधिकतर बीमारियाँ ठीक होने लगती हैं|
आगे चलकर आपको बताएँगे कि आप जीवन शैली में कैसे बदलाव करें |
7.जल्दी सोना – जल्दी उठना – अच्छी आदतें

अंग्रेजी कहावत है – ‘Early to bed , early to rise , makes a man healthy wealthy and wise’.- बिलकुल सही है |
इस आदत को जीवन में जरुर उतारे , मैंने तो अपना लिया है | दिन भर की भाग दौड़ में हम थोडा आराम नहीं कर पाते है और जब थोड़ा समय मिलता है उसमे गेजेट्स लेकर बैठ जाते हैं |
जीवन को संतुलित बनाना है और जीने का मजा भी लेना है तो जल्दी सोने और जल्दी उठने का नियम आज से ही बना लें , हो सकता शुरू में परेशानी हो लेकिन शरीर की जैविक घडी उसके अनुसार सेट हो ज जाएगी
ये जरूरी है कि सब काम नियत समय से पूरे करने की कोशिश करें | सबसे पहले खाना समय पर खाएं , रात को तो खाना ९ बजे से पहले खा लें , उसके बाद कुछ टहले |
रात को सोने से पहले थोड़ा गुनगुना दूध पीयें अगर आपको अच्छा लगता है तो और10 बजे तक सोने की कोशिश करें |
7-8 घंटे की नींद ले | इससे आपकी प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होगा |अपने बच्चों को तो अभी से यही दिनचर्या की आदत डालना शुरू करें |
8.योगा और मेडिटेशन का साथ

आज बिगड़ी जीवन शैली का प्रभाव शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है |हम समझ ही नहीं पाते कि क्या करें|
ऎसी स्थिति में योगा और मेडिटेशन का साथ हो तो इन समस्याओं से आसानी से निपटा जा सकता है |
कोशिश करें के सवेरे 4 से 5 बजे के बीच उठ जाएँ , इस समय शान्ति रहती है ,वातावरण तरोताजा होता है |
खाली पेट ताजा पानी पीयें और कुछ देर टहले फिर अपने दैनिक कार्यो से निवृत होलें |
आपके घर में जहाँ भी खुली जगह है तो वहा योगा मेट बिछा ले और बैठकर गहरी साँसे लें | फिर कुछ समय ध्यान करें , अगर आप चाहे तो अनुलोम विलोम , प्राणायाम करें |
लगातार कुछ दिनों तक करने पर आप देखेंगे कि आपके अन्दर सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है |
9.उचित/ पौष्टिक भोजन जरूरी है
पौष्टिक भोजन हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ साथ हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी अनुकूल प्रभाव डालता है | वैसे भी कहा गया है “ जैसा खाओ अन्न , वैसा हो मन” |
दोस्तों यह सत्य है इसलिए आप कोशिश करे कि अपनी क्षमता के अनुसार उचित मात्रा में कार्बो हाइड्रेट , प्रोटीन , वसा और खनिज , विटामिन और रेशो युक्त भोजन लें|
निष्कर्ष : नियमित समय पर भोजन, व्यायाम,योग,ध्यान और सकारात्मक जीवन शैली अपनाकर आप हमेशा स्वस्थ रह सकते है | छोटें-छोटे नियम अपनाएं और लम्बे समय तक इनको follow करें|